इशरत जहान एनकाउंटर केस के आरोपी डीजी बंजारा और नरेन्द्र अमीन ने केस से खुद को बरी किए जाने की कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन लगाई थी। पिछले महीने कोर्ट ने दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार को कोर्ट ने सुनवाई करते हुए दोनों की डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज कर दी।
तत्कालीन गुजरात डीआईजी बंजारा ने कोर्ट में इस आधार पर डिस्चार्ज एप्लीकेशन लगाई थी कि कोर्ट ने इसी केस में आरोपी बनाए गए तत्कालीन गुजरात डीजीपी पीपी पांडे को इस साल फरवरी महीने में साक्ष्यों के अभाव में बरी किया था। बंजारा ने कोर्ट में यह भी दावा किया था कि चार्जशीट में उनके खिलाफ ऐसे साक्ष्य नहीं हैं कि उनके खिलाफ केस चलाया जा सके। सीबीआई ने तो इस केस में तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पूछताछ की थी। वहीं नरेन्द्र अमीन ने डिस्चार्ज एप्लीकेशन में एनकाउंटर को सही बताते हुए सीबीआई की जांच को भरोसेमंद नहीं बताया था।
इसके विरोध में इशरत जहान की मां ने बंजारा और नरेन्द्र अमीन की डिस्चार्ज एप्लीकेशन का कोर्ट में विरोध किया था। इषरत जहान की मां ने कोर्ट में तर्क रखा था कि उनकी बेटी की पुलिस अधिकारियों और अन्य रसूकदारों ने मिलकर बड़ी साजिश के तहत हत्या की थी। इस षड्यंत्र में और इसे अंजाम देने में बंजारा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
गौरतलब है कि 15 जून 2004 को मुंबई की मुंबरा निवासी 19 साल की युवती इशरत जहान और जावेद शेख के साथ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जोहर को पुलिस एनकाउंटर में अहमदाबाद के बाद मार दिया गया था। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि इन चार लोगों के आंतकवादियों से संबंध थे और इन्हें यहां तत्कालीन गुजरात सीएम नरेन्द्र मोदी को मारने के लिए भेजा गया था।
स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने इसके फर्जी एनकाउंटर केस होने का दावा किया था। इसके बाद कोर्ट ने यह केस सीबीआई को जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया था। सीबीआई ने तत्कालीन डीजीपी पीपी पांडे, डीआईजी डीजी बंजारा और जीएल सिंघल सहित सात पुलिस अधिकारियों को आरोपी बनाते हुए 2013 में पहली चार्जशीट पेश की थी। केस में सीबीआई ने इनको साजिश रचने, अपहरण और हत्या का आरोप मानते हुए चार्जशीट पेश की थी।
डीजी बंजारा और नरेन्द्र अमीन को सीबीआई ने सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापतति एनकाउंटर केस में भी आरोपी मानते हुए चार्जषीट पेश की थी, हालां कि इस केस से दोनों सेषन कोर्ट से बरी हो चुके हैं और इनके खिलाफ हुई अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
