सीबीआई पीपी पर उठे सवाल, कोर्ट ने कहा विरोधाभास हो तो ही पूछो
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में गुरूवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में एडीशनल एसपी सुधीर जोशी और डीआईजी हिंगलाज दान बयान देने पहुंचे। सुधीर जोशी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने तुलसी को 29 नवंबर 2005 को गिरफ्तार किया था।
जबकि जोशी के सीआरपीसी की धारा 161 के तहत हुए बयानों में उन्होंने तारीख 29 नवंबर और धारा 164 के तहत हुए बयानों में तारीख 26 नवंबर बताई थी। बयानों में विरोधाभास होने के बावजूद सीबीआई ने जोशी को न तो होस्टाइल घोषित किया और न ही बयानों के दौरान धारा 164 के तहत पूर्व में हुए बयानों से संबंधित कोई प्रश्न किए। जबकि तत्कालीन निरीक्षक रणविजय सिंह, भंवर सिंह हाड़ा और हिम्मत सिंह के जब कोर्ट में बयान हुए थे तो उनके धारा 164 के तहत हुए बयानों से संबंधित न सिर्फ प्रश्न किए गए थे, बल्कि हाड़ा और हिम्मत सिंह को तो इस आधार पर सीबीआई ने होस्टाइल घोषित कर दिया था।
विष्वसनीय मुखबीर की सूचना पर गए थे भीलवाड़ा
सुधीर जोशी ने कोर्ट को बताया कि वे 2005 में उदयपुर के पष्चिम सर्किल में डीएसपी थे। उनके सर्किल के हाथीपोल थाना क्षेत्र में हुए हामिदलाल हत्याकांड में आजम सहित कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी और तुलसी राम और सोहराबुद्दीन वांछित थे। पुलिस इनकी तलाश में जुटी हुई थी। नवंबर 2005 के आखिरी दिनों में उन्हें विश्वनीय मुखबीर से तुलसीराम के भीलवाड़ा में होने और समीर नाम से रहने की सूचना मिली थी।
यह जानकारी उन्होंने सीनियर आॅफीसर्स को दी और हामिरलाला हत्याकांड में जांचअधिकारी हाथीपोल निरीक्षक भंवरसिंह हाड़ा और रणविजय सिंह को साथ लेकर 8-9 पुलिस कर्मियों की टीम बनाई और उसी दिन भीलवाड़ा गए। वहां मेरा दोस्त विष्वसनीय मुखबीर मिला, उसने मुझे समीर नाम के युवक के घर तक पहुंचने में मदद की। घर बताकर वह चला गया और हमने उस घर पर दबिश दे कर तुलसी उर्फ समीर को पकड़कर उदयपुर लाए और उसी दिन थाने पर रोजनामचा और केस डायरी में रपट डालकर उसे केस में गिरफ्तार कर लिया। फिर जयपुर ट्रेनिंग पर चला गया था।
रेलवे टेक से मिला मोबाइल की जानकारी मैंने ही जुटाई थी
सुधीर जोशी ने कोर्ट को बताया कि करीब एक वर्ष बाद दिसंबर 2006 की सुबह कंट्रोल रूम से उन्हें सूचना मिली थी कि तुलसीराम अहमदाबाद से उदयपुर पेशी समय फरार हो गया है। इस पर शहर में नाकाबंदी कराई गई। मुझे सीनियर आॅफीसर शायद एडिशनल एसपी थे उन्होंने तुलसी के फरार होते समय टेक पर गिरे मोबाइल काॅल लाॅग का एक नंबर बताया और काॅल डिटेल और सबस्क्राइबर निकालने का टास्क दिया। मेरी दूसरे स्टेट के पुलिस आॅफीसर और मोबाइल के नोडल आॅफीसर्स से जानकारी थी, तो मुझे ये टास्क दिया गया था। मैंने इसके लिए दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के इंटर स्टेट सेल के डीएसपी टंडन को मेल और काॅल कर इस मोंबाइल नंबर की डिटेल मांगी। उन्होंने यह नंबर एमपी का होना बताया और एमपी के एक नोडल आॅफीसर दिलीप का नंबर दिया। मैंने दिलीप को काॅल और मेल किया और इस नंबर की डिटेल मांगी तो उन्होंने मुझे बताया कि यह गुजरात रोमिंग और हच नेटवर्क में चल रहा है। उन्होंने गुजरात नोडल आफीसर से नंबर की लोकेशन टेलीफोनिक पूछने को कहा। उन दिनों हम टेलीफोनिक ही लोकेशन ले लिया करते थे। सीनियर आॅफीसर ने मुझे कुछ लेटर डिक्टेट कर लिखाए और बनासकांठा और एटीएस गुजरात को फैक्स करा दिए थे। मुझे बाद में न्यूजपेपर से पता चला कि वह गुजरात में मुठभेड़ में मारा गया था।
जो आज बोला, वही बयान धारा 164 के तहत दिए थे
सीबीआई के स्पेशल पीपी के पूछने पर जोशी ने बनासकांठा एसपी और एटीएस को भेजे फैक्स की पहचान की। जोशी ने बताया कि सीबीआई ने मुझसे पूछताछ की थी, एक बार बयान लिए थे और एक बार बयान कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत भी करवाए थे। जोशी ने बताया कि उसने जो आज यहां बताया है, वहीं बयान धारा 164 के तहत पूर्व में हुए बयान में बताया था।
सीबीआई पीपी पर उठे सवाल
सीबीआई की चार्जशीट में शामिल सुधीर जोशी के धारा 164 के तहत हुए बयानों और गुरूवार को कोर्ट को दिए बयानों में काफी अंतर पाया गया है। गिरफ्तारी की तारीख, अधिकारियों से बातचीत, मुखबीर सहित अन्य बिंदुओं पर विरोधाभास रहा, लेकिन सीबीआई ने होस्टाइल घोषित नहीं किया। इससे सीबीआई पीपी पर भी सवाल उठे हैं।
कोर्ट ने कहा विरोधाभास हो तो ही पूछो
सीबीआई के पीपी बीपी राजू ने कोर्ट में सुधीर जोशी के धारा 164 के तहत हुए बयानों को खोलने की बात कही तो न्यायाधीश ने कहा कि अगर आज इनके बयानों में कोई विरोधाभास पाते हो तो पूछ सकते हो, तो पीपी ने विरोधाभास होने से इनकार कर दिया। ऐसे में कोर्ट में धारा 164 के तहत हुए बयानों को न तो पढ़ा गया और न ही संबंधित प्रष्न पूछे गए।
सीआईडी और सीबीआई के बयान पढकर पूछे आपने दिए क्या
कोर्ट में क्राॅस क्वेष्चनिंग में बचाव पक्ष के वकील वहाव खान ने सुधीर जोशी के सीआईडी गुजरात और 12 मई 2010 को सीबीआई को दिए धारा 161 के तहत बयान पढ़कर सुनाए और पूछा ये आपने ही दिए थे, तो सुधीर जोशी ने कोर्ट को बताया कि हां ये बयान मैंने ही दिए थे और यही आज कोर्ट को बताया है। सुधीर जोशी ने 29 नवंबर 2005 को तुलसी की गिरफ्तारी के लिए रवाना होते समय और लौटने के बाद रोजनामचे में डाली गई रपट पर किए हस्ताक्षर की पहचान की और कहा यह मैंने ही लिखा था।
एनएचआरसी का परिवाद आया था, जो जांच को सूरजपोल थाने भेज दिया था
डीआईजी हिंगलाज दान ने कोर्ट को बताया कि तुलसी उदयपुर की सेंटल जेल में था और तुलसी का एनएचआरसी को भेजा गया एक परिवाद एसपी आॅफिस के जरिए जांच के लिए आया था। मैंने वह परिवाद जांच के लिए आवष्यक कार्यवाही करने के निर्देष के साथ सूरजपोल थाने भेज दिया था। क्या जांच रिपोर्ट आई थी पता नही। कुछ महीनों बाद कंटोल रूम से तुलसी के पुलिस कस्टडी से भागने का वायरलैस सुना था, तब उसके भागने की जानकारी मिली थी। पीपी के पूछने पर हिंगलाज दान ने बताया कि उन्होंने सोहराबुद्दीन और तुलसी एनकाउंटर के बारे में लोगों से सुना और न्यूज पेपर में पढा था। वे सीधे तौर पर इन केस से कभी जुड़े नहीं रहे।

