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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : सीबीआई की नयी दस्तावेज सूची पर बचाव पक्ष के वकीलों ने आपत्ति की तो कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर एग्जीबिट किए दस्तावेज 

34 दस्तावेजों की सूची एग्जीबिट नहीं हुई, तो सीबीआई संशोधित कर 10 दस्तावेजों की सूची लाई।

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकांटर केस में मंगल़़वार को मुंबई स्पेशल कोर्ट में सीबीआई ने 34 दस्तावेजों की सूची को संशोधित कर 10 दस्तावेजों की सूची के साथ एप्लीकेशन कोर्ट में लगाई। इस सूची में शामिल दस्तावेजों को एग्जीबिट करने पर बचाव पक्ष के वकीलों ने आपत्ति की। इस पर कोर्ट ने स्व विवके संज्ञान लेकर सीआरपीसी की धारा 293 के तहत ये दस्तावेज एग्जीबिट कर लिए।

गौरतलब है कि सीबीआई ने 24 जुलाई को कोर्ट में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से संबंधित 18 और तुलसी से संबंधित  14 दस्तावेजों की सूची पेश की थी। सोमवार को बचाव पक्ष के वकीलों ने सूची में शामिल दस्तावेजों को एग्जीबिट करने से इनकार कर कोर्ट को बताया था कि इस सूची में ऐसे कई दस्तावेज हैं जो धारा 293 के तहत नहीं आते हैं। इस पर कोर्ट को गुमराह करने के प्रयास में कोर्ट ने सीबीआई की फटकार लगाई थी। इस पर मंगलवार को सीबीआई ने 34 दस्तावेजों की सूची को संशोधित कर इनमें 10 दस्तावेजों की एक नयी सूची बनाई और इन्हें एग्जीबिट करवाने के लिए मंगलवार को कोर्ट में एप्लीकेशन लगाई।

इन 10 दस्तावेजों को एग्जीबिट करने पर बचाव पक्ष के वकीलों ने आपत्ति जताई, तो कोर्ट ने स्व विवेक से संज्ञान लेकर ये दस्तावेज एग्जीबिट कर लिए और एग्जीबिट नंबर भी डाले। हालां कि धारा 293 के तहत बचाव पक्ष को भी यह अधिकार प्राप्त है कि वह इन दस्तावेजों से संबंधित गवाहों को कोर्ट में क्राॅस क्वेश्चनिंग के लिए बुला सकते है।

इन 10 दस्तावेजों की सूची में सोहराबुद्दीन की मोबाइल डेटा, एनकाउंटर के बाद जब्त हुए कपड़े, हथियार, क्राॅस फायरिंग में उपयोग हुए पुलिस के हथियारों की एफएसएल रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज शामिल हैैं।

खासबात यह है कि इन दस्तावेजों से संबंधित एफएसएल साइंटिस्ट, डाॅक्टर्स के बयान पूर्व में ही हो चुके हैं।  तब सीबीआई ने न तो इन दस्तावेजों का जिक्र किया था और न ही इन दस्तावेजों को एग्जीबिट करवाया था। ऐसे में अब इन दस्तावेजों को एग्जीबिट करवाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूची से हटाए गए दस्तावेज बरी हो चुके पांडियन से सम्बंधित भी

सीबीआई ने जिन 24 दस्तावेजों को सूची से हटाया है, उनमें एयरपोर्ट पर यात्री द्वारा भरा जाने वाला डिक्लियरेशन फाॅर्म भी था, यह डिक्लियरेशन फाॅर्म हैदराबाद से अहमदाबाद लौटते समय राजकुमार पांडियन के नाम से इंटरनेशनल फ्लाइट में बैठने से पहले भरा गया था। सीबीआई ने अनुसंधान में जब इस फाॅर्म का हैंडराइटिंग टेस्ट करवाया था तो यह पांडियन की हैंडराइटिंग से मिलने के बजाए पांडियन के रीडर कांस्टेबल अजय परमार की हैंडराइटिंग से मिली थी। यह फाॅर्म इंटरनेशनल फ्लाइट में सफर करने जा रहे यात्री से बोर्डिंग और सुरक्षा चैकिंग के बाद भरवाया जाता है। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार पांडियन हैदराबाद से अहमदाबाद फ्लाइट से नहीं लौटे थे, बल्कि गाड़ी में सोहराबुद्दीन और कौसरबी का अपहरण कर अहमदाबाद लाए थे।

दूसरा महत्वपूर्ण दस्तावेज अहमदाबाद के निरीक्षक एनवी चौहान से संबंधित थे, जिसमें पुलिस जीप की लाॅग बुक में एनवी चैहान के हस्ताक्षर थे और इन हस्ताक्षरों से एनवी चैहान के हस्ताक्षरों का मिलान भी हुआ था। इसके अलावा सीबीआई ने इलोल गई पुलिस जीप की डीएनए रिपोर्ट, सीडीआर की सीडी, क्यूयूईडी की सभी रिपोर्ट्स, कुछ एफएसएल और सीएफएसएल रिपोर्ट्स के दस्तावेजों को शामिल नहीं किया है।

आईडिया कंपनी के नोडल आॅफिसर के हुए बयान

कोर्ट में मंगलवार को हैदराबाद में आईडिया कंपनी के नोडल आॅफिसर अरूण माधवन और अहमदाबाद आईडिया कंपनी के नोडल आॅफिसर भाविक जोशी के बयान हुए।

अरूण माधवन ने बताया कि एनएन ट्रांसपोर्ट कंपनी ने सीयूजी के तहत 9 सिम ली थीं, इनमें से एक सिम हैदराबाद इंस्पेक्टर श्रीनिवास उपयोग कर रहे थे। वहीं भाविक के बयान तुलसी के पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिले मोबाइल और  एनकाउंटर के बाद तुलसी के कब्जे से मिले मोबाइल की काॅल डिटेल से संबंधित थे। भाविक ने बताया कि इनका रिकाॅर्ड 25 से 28 दिसंबर 2006 के बीच का था, इसका हमारे पास कोई रिकाॅर्ड नहीं था, क्यों कि ट्राई रेगुलेशन के अनुसार एक साल से पुराना रिकाॅर्ड हम संधारित नहीं करते है।

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