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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : सीबीआई को ट्रायल पूरी करने की इतनी जल्दी कि बिना गवाह बुलाए दस्तावेज एडमिट करने की कोर्ट को दे दी एप्लीकेशन

तुलसी एनकाउंटर की रिपोर्ट, एफआईआर, स्टेशन डायरी और दिनेश एमएन का भेजा फैक्स एग्जीबिट हुआ।

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में गुरुवार को सीबीआई ने मुंबई कोर्ट में तीन गवाहों के बयान कराए बगैर ही तुलसी एनकाउंटर की रिपोर्ट, एफआईआर, पुलिस डायरी और दिनेश एमएन का विपुल अग्रवाल को भेजा फैक्स एग्जीबिट करवा दिया।

सभी तब ज्यादा चौंक गए जब सीबीआई ने सरकारी वकील बीपी राजू के जरिए  सोहराबुद्दिन, तुलसी एनकाउंटर की एफएसएल से संबंधित 35 दस्तावेजों की सूची भी कोर्ट में पेश की और इन दस्तावेजों को कोर्ट में एग्जीबिट करवाने का प्रार्थना पत्र पेश किया। सीबीआई ने तर्क दिया कि दस्तावेजों को एग्जीबिट करा संबंधित गवाहों के बयान नहीं कराने से कोर्ट का समय बचेगा। सीबीआई की इस एप्लीकेशन पर कोर्ट ने आरोपी पक्ष के वकीलों से सोमवार तक जवाब मांगा है।

 बिना बयान के लौटे गवाह

मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में बुधवार को तीन गवाह होने थे। गवाह माधव ठाकोर 27 दिसंबर 2006 को पुलिस कंट्रोल रूम पालनपुरा फैक्स ऑपरेटर था, इन्होंने उदयपुर एसपी दिनेश एमएन के एसपी बनासकांठा विपुल अग्रवाल के नाम भेजे तुलसी के फरार होने के फैक्स को रिसीव किया था। दूसरा गवाह अशोक भाई पंडोर ने इस फैक्स को कंट्रोल रूम से ले जाकर एसपी विपुल अग्रवाल को दिया था। तीसरा गवाह नैनचंद श्रीमाली था, यह तुलसी एनकाउंटर के समय अंबाजी थाने में कांस्टेबल था और तुलसी के भागने और अलर्ट की सूचना रोजनामचा (स्टेशन डायरी) में लिखी थी। हालां कि तुलसी एनकाउंटर टीम में शामिल इंस्पेक्टर आशीष पांडिया द्वारा अंबाजी थाने में दी गई रिपोर्ट और एफआईआर संबंधित कोई गवाह नहीं आए। 

सीबीआई की वकील बीपी राजू ने फैक्स, रोजनामचा, रिपोर्ट और एफआईआर कोर्ट में पेश की। आरोपी आशीष पांडिया ने रिपोर्ट और एफआईआर स्वीकार कर ली, वहीं अन्य आरोपियों के वकीलों ने भी ये दस्तावेज स्वीकार किए। इस पर कोर्ट ने आरोपी पक्ष के वकीलों की कोई आपत्ति नहीं आने पर सभी दस्तावेज एग्जीबिट किए। तीनों गवाह इन दस्तावेज से संबंधित थे तो इनके बयान नहीं कराए गए।

बिना गवाह दस्तावेज में एडमिट करवाने का लगाया प्रार्थना पत्र

सीबीआई वकील बीपी राजू ने कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पेश किया। इसके तहत एफएसएल, सीएफएसएल और जीईक्यूडी से संबंधित दस्तावेज सीआरपीसी की धारा 293 के तहत बिना संबंधित गवाह बुलाए कोर्ट में एडमिट करने का निवेदन किया। प्रार्थना पत्र के साथ तर्क दिया कि इससे कोर्ट का समय बचेगा। प्रार्थना पत्र के साथ ही सीबीआई ने सोहराबुद्दिन, तुलसी एनकाउंटर की एफएसएल से संबंधित 35 दस्तावेजों की सूची भी प्रस्तुत की, जो बिना गवाह एडमिट करवाने हैं। कोर्ट ने इस पर आरोपी पक्ष के वकीलों का सोमवार को जवाब मांगा है।

इसके विपरीत हाईकोर्ट में तीनों आईपीएस और डीएसपी व कांस्टेबल के बरी होने के आदेश के खिलाफ लगी रूबाबुद्दीन और सीबीआई की एप्लीकेशन पिछले दो वर्षों से पेंडिंग है। लेकिन सीबीआई इस आेर ध्यान तक नहीं दे रही।

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