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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : अनुसंधान अधिकारियों के बयान शुरू हुए, आखिर क्यों आईओ ने लगाया कोर्ट में एफिडेविट

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में मंगलवार से मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में केस में रहे अनुसंधान अधिकारियों के बयान शुरू हो गए।

तुलसी एनकाउंटर केस की जांच के सुपरवाइजरी ऑफिसर रहे तत्कालीन डीएसपी प्रोबेशनर मयूर चावड़ा ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने 8 जून 2011 को उनके जो बयान लिखे थे, वह उन्होंने नहीं दिए थे। सीबीआई में लिखे गए बयानों की जानकारी मुझे समाचार पत्रों से मिली तो उन्होंने इस संबंध में 2011 में ही गुजरात कोर्ट में एफीडेविट भी लगाया था।

मयूर चावड़ा ने आज कोर्ट को बताया कि 27-28 मध्यरात्री दिसंबर 2006 को तुलसी एनकाउंटर के बाद उन्हें बनासकांठा एसपी विपुल अग्रवाल ने कॉल किया था, जिस पर मैं तुलसी के एनकाउंटर स्पॉट पर गया था। मौके पर हुई समस्त कार्रवाई और अंबाजी में दर्ज हुए प्रकरण के अनुसंधान का का सुपरविजन किया था। जांच सीबीआई के पास गई तो सीबीआई ने मेरे बयान लिए थे। लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे अखबारों से माध्यम से सीबीआई में लिखे गए मेरे बयानों का पता चला। सीबीआई ने जो बयान लिखे थे वह मैंने नहीं दिए थे, ऐसे में उस समय ही मैंने कोर्ट में एक एफीडेविट प्रस्तुत कर यह बताया था कि सीबीआई में लिखे बयान मैंने नहीं दिए हैं।
 ये बयान सीबीआई की चार्जशीट में शामिल थे 

तत्कालीन डीएसपी प्रोबेशनर अंबाजी मयूर चावड़ा के सीबीआई की चार्जशीट में शामिल बयानों में लिखा है कि उन्हें तत्कालीन एसपी विपुल अग्रवाल ने हॉस्पिटल बुलाया था। वहां तुलसीराम का शव मोर्चरी में रखा था और निरीक्षक आशीष पंड्या घायल थे। एसपी अग्रवाल मुझे क्राइम स्पॉट पर ले गए। वहां उन्होंने पूरे सीन ऑफ क्राइम को इस तरह से एक्सप्लेन किया, जैसे वे घटना के समय मौजूद थे और उन्हें पूरे घटनाक्रम की पहले से ही जानकारी थी। वहीं आशीष पंड्या 26 दिसंबर को मुझे सिविल कपड़ों में एसपी ऑफिस से निकलते हुए दिखे थे, तब उनके पास उनकी गन थे। हॉस्पिटल में वे मुझे घायल मिले थे।

गवाह ने कहा मैंने बनाए थे फर्द-पंचनामे

अंबाजी थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर भायलाल तुलसी एनकाउंटर के अनुसंधान अधिकारी रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अनुसंधान के दौरान वे तुलसी एनकाउंटर स्पॉट पर गए थे। मौका-मुआयना के बाद उन्होंने मौके पर चले कारतूस, हथियार, तुलसी के कपड़े सहित अन्य सामान जब्त किए थे। अनुसंधान के दौरान जब्त सामान के फर्द-पंचनामा भी उन्होंने बनाए थे। कोर्ट में भायलाल के बयानों के साथ ही उस समय बने फर्द-पंचनामा भी एग्जीबिट हुए।

 

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