उदयपुर के जिला उपभोक्ता मंच ने गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नीकल स्टडीज के डायरेक्टर को कोर्स के प्रथम वर्ष के अलावा अन्य वर्षों में भी फीस के साथ डवलपमेंट शुल्क वसूलने पर परिवादी को 30 हजार रुपए, कॉशन मनी के शेष 500 रुपए, मानसिक संताप व परिवाद व्यय के दो-दो हजार रुपए कुल 34500 रुपए अदा करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश मंच के अध्यक्ष हिमांशु राय नागौरी, सदस्य भारत भूषण ओझा और अंजना जोशी की बैंच ने दिए हैं।
प्रकरण के अनुसार गायरियावास निवासी पर्वत सिंह बिलावत ने 28 जनवरी 2016 को जिला उपभोक्ता मंच में गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नीकल स्टडीज के डायरेक्टर और प्रिंसीपल के खिलाफ परिवाद दायर किया था। परिवादी ने परिवाद में बताया था कि उसने 2010-11 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के कोर्स में प्रवेश लिया था। यह चार वर्षीय कोर्स था जो 2014 में पूरा हुआ। इन चार वर्ष में इंस्टीट्यूट ने प्रति वर्ष ट्यूशन फीस के साथ ही परिवादी से डवलपमेंट शुल्क (10-10 हजार रुपए प्रति वर्ष), आरटीयू फीस, परीक्षा शुल्क, बस फीस, आईकार्ड ब्रांच शुल्क और सिर्फ पहले वर्ष ली गई कॉशन मनी व बुक बैंक सिक्योरिटी शुल्क 8 हजार रुपए लिए। कोर्स खत्म होने पर परिवादी ने कॉशन मनी के आठ हजार रुपए वापस देने के लिए कहा तो इंस्टीट्यूट ने राशि नहीं लौटाई। इंस्टीट्यूट ने चार वर्षाें में डवलपमेंट चार्ज के 40 हजार रुपए लिए थे, जो वे नियमानुसार नहीं ले सकते थे। परिवाद दायर करने के बाद इंस्टीट्यूट ने परिवादी छात्र को 500 रुपए कम कर 7500 रुपए कॉशन मनी लौटाई।
मंच में सुनवाई के दौरान तथ्य सामने आया कि