Site iconSite icon AR Live News

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर: सीबीआई की इस दोहरी नीति को लेकर अधीनस्थ पुलिस कर्मियों में रोष, नीयत पर जताया अंदेशा

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में मंगलवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सीबीआई के सरकारी वकील ने चार्जशीट से अलग कुछ दस्तावेज पेश किए। यह दस्तावेज तुलसी एनकाउंटर में शामिल एएसआई नारायण सिंह, कांस्टेबल युद्धवीर सिंह और बरी हो चुके दलतप सिंह से संबंधित थे। कोर्ट में पेश हुए इन दस्तावेज के साथ ही सीबीआई की दोहरी नीति को लेकर भी ट्रायल भुगत रहे 22 अधिनस्थ कर्मचारियों में रोष है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को कोर्ट में चार गवाह उपस्थित होने थे। लेकिन वे चारों ही नहीं आए। इसी दौरान कोर्ट में सीबीआई के सरकारी वकील बीपी राजू ने तुलसी के एनकाउंटर में शामिल राजस्थान टीम को इशू हुए हथियार से संबंधित कुछ दस्तावेज कोर्ट में पेश् किए। ये दस्तावेज चार्जशीट का हिस्सा नहीं थे, ऐसे में बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के समक्ष सख्त विरोध जताया। आरोपी पक्ष के अब्दुल रहमान के वकील वहाव खान ने विरोध जताते हुए कोर्ट को कहा कि गवाहों की आखिरी लिस्ट आ चुकी है, इस समय सीबीआई का चार्जशीट से अलग हटकर विटनेस या डाॅक्यूमेंटस लाना डिफेंस को डैमेज कर सकता है। ऐसे में कोर्ट से निवेदन है कि चार्जशीट से हटकर कोई नए गवाह और दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएं।
इस पर सीबीआई के सरकारी वकील बीपी राजू ने कोर्ट व बचाव पक्ष के वकीलों को आश्वस्त किया कि यह आखिरी दस्तावेज हैं, इसके बाद वे कोई नया दस्तावेज पेश नहीं करेंगे। भविष्य में चार्जशीट से हटकर कोई भी नया दस्तावेज या गवाह पेश नहीं करने की शर्त पर आरोपी पक्ष के वकीलों की सहमति के साथ कोर्ट ने उक्त दस्तावेज स्वीकार कर लिए। 
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी सीबीआई चार्जशीट में शामिल 706 गवाहों की लिस्ट से बाहर जाकर एक नए गवाह हैदराबाद के आरटीओ अधिकारी सुरेश राॅय को कोर्ट ला चुकी है। सीबीआई ने कोर्ट में सुरेश राॅय के बयान करवाए थे, जबकि उनका नाम चार्जशीट में शामिल गवाहों की सूची में शामिल नहीं था।
केस के इस स्टेज पर जब गवाहों की आखिरी सूची ट्रायल कोर्ट में पेश हो चुकी है, तब सीबीआई के नए दस्तावेज पेश करने की नीति को लेकर ट्रायल फेस कर रहे अधिनस्थ पुलिस कर्मियों और उनके वकीलों में भारी रोष है।
ट्रायल भुगत रहे अधिनस्थ पुलिसकर्मियों और उनके वकीलों ने सीबीआई की दोहरी नीति को लेकर आशंका जताई है। एक तरफ तो सीबीआई केस में बरी हो चुके रसूकदार लोगों और आईपीएस के खिलाफ अपील करने का साहस जुटाना तो दूर हाईकोर्ट के मांगे जाने के बावजूद इन आईपीएस से संबंधित चार्जशीट में शामिल दस्तावेज तक कोर्ट को उपलब्ध नहीं करवा पाई। हद तो तब हुई जब गत दिनों सीबीआई ने केस में बरी हो चुके आईपीएस राजकुमार पांडियन  के विरूद्ध चार्जशीट करने, उनकी जमानत एप्लीकेशन का विभिन्न कोर्ट में विरोध करने और आरोपी के सात वर्ष तक जेल में रहने के बावजूद डिस्चार्ज एप्लीकेशन की सुनवाई के दौरान किसी प्रकार का सबमिशन या विरोध करने से भी इनकार कर दिया था। 
वहीं दूसरी तरफ यही सीबीआई केस में बरी हुए एक मात्र कांस्टेबल दलपत सिंह सहित तुलसी एनकाउंटर में शामिल राजस्थान पुलिस की टीम के खिलाफ चार्जषीट से बाहर जाकर दस्तावेज पेश कर रही है।
Exit mobile version