Site iconSite icon AR Live News

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : एसआई हिमांशु-श्याम सिंह की हाईकोर्ट में लगी डिस्चार्ज एप्लिकेशन हुई खारिज

: अभियोजन स्वीकृति के अभाव में आईपीएस पंड्यन के बरी होने के आदेश के आधार पर ही लगाई थी इनकी याचिका।
 : हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ अदालत में ट्रायल चल रही है और125 गवाह हो चुके हैं, ऐसे में ये अभी यहां से डिस्चार्ज पाने के हकदार नहीं है। 
विशेष संवाददाता। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में बुधवार को मुंबई हाईकोर्ट में उदयपुर टीम के एसआई हिमांशु सिंह और श्याम सिंह की डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर सुनवाई कर खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि अधीनस्थ अदालत में ट्रायल चल रही है और इसमें 125 गवाह हो चुके हैं, ऐसे में ये अभी यहां से डिस्चार्ज पाने के हकदार नहीं है।
खासबात यह है कि सीआरपीसी की धारा 227 (साक्ष्यों के अभाव में) और 197 (अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर) के तहत हिमांशु सिंह और श्याम सिंह की एप्लीकेशन लगाई गई थी। इनकी याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में आईपीएस राजकुमार पंड्यन की एप्लीकेशन पर सुनवाई शुरू हुई। राजकुमार पंड्यन ने भी सेशन कोर्ट में धारा 227 और 197 के तहत याचिका लगाई थी, तब सेशन कोर्ट ने धारा 227 के तहत लगी याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन अभियोजन स्वीकृति नहीं होने पर पंड्यन को धारा 197 के तहत बरी कर दिया था। इस आदेश को  सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को याचिका पर शुरू हुई सुनवाई के दौरान रुबाबुद्दीन के वकील ने अपना पक्ष रखा। गुरुवार को राजकुमार पंड्यन के वकील पक्ष रखेंगे।
राजकुमार पंड्यन बरी हुए, इसी आधार पर लगाई थी डिस्चार्ज एप्लीकेशन 
 हिमांशु सिंह, श्याम सिंह के वकील महर घीवाला और वकील ईशान जानी  ने बताया कि सरकारी कर्मचारी पर केस चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सरकार या संबंधित विभाग से अभियोजन स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। लेकिन इस केस में सीबीआई ने किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं ली हुई है। धारा 227 और 197 के तहत हमने सेशन कोर्ट में गत वर्ष डिस्चार्ज एप्लीकेशन लगाई थी, जिसे सेशन कोर्ट ने जुलाई 2017 में खारिज कर दिया था। सरकारी कर्मचारी होने के नाते आईपीएस राजकुमार पंड्यन धारा 197 के तहत सेशन कोर्ट से बरी हुए थे। राजकुमार पंड्यन की तरह मेरे क्लाइंट एसआई हिमांशु सिंह और श्याम सिंह भी सरकारी कर्मचारी हैं, तो पंड्यन के बरी होने के आदेश को आधार बनाकर हमने मेरे क्लाइंट हिमांशु सिंह और श्याम सिंह के लिए धारा 227 और 197 के तहत हाईकोर्ट में सेशन कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिवीजन पिटीशन लगाई थी। इसके बाद नवंबर 2017 से केस में ट्रायल शुरू हो गई।
बुधवार को हाईकोर्ट ने एप्लीकेशन को खारिज करते हुए कहा कि सेशन कोर्ट में ट्रायल चल रही है, 125 गवाह हो चुके हैं, ये ट्रायल फेस कर रहे हैं, तो अभी ये यहां से डिस्चार्ज पाने के हकदार (एनटाइटल्ड) नहीं है।
इन आठ याचिकाओं पर हाईकोर्ट में शुरू हुई सुनवाई 

: बुधवार से हाईकोर्ट में आईपीएस दिनेश एमएन, डीजी बंजारा, राजकुमार पंड्यन, डीएसपी नरेन्द्र अमीन, कांस्टेबल दलपत सिंह के बरी होने संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई है। इन पांचों को सेशन कोर्ट से बरी किया जा चुका है। तीनों आईपीएस के बरी होने के आदेश को रुबाबुद्दीन और डीएसपी व कांस्टेबल के बरी होने के आदेश को सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है।

: आईपीएस विपुल अग्रवाल, एसअाई हिमांशु सिंह, श्याम सिंह की धारा 227 और 197 के तहत लगी  डिस्चार्ज एप्लीकेशन को सेशन कोर्ट से खारिज कर दिया गया था। इस आदेश को इन तीनों ने  हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। एक ही मामले से संबंधित होने के चलते हाईकोर्ट में इन सभी की एप्लीकेशन को क्लब कर सुनवाई शुरू की गई।

: आईपीएस विपुल अग्रवाल को एक महीने बाद की तारीख दी है। ऐसे में अब डिस्चार्ज हो चुके आईपीएस दिनेश एमएन, डीजी बंजारा, राजकुमार पंड्यन, डीएसपी नरेन्द्र अमीन, कांस्टेबल दलपत सिंह पर सुनवाई है। 

Exit mobile version