Site iconSite icon AR Live News

सोहराबुद्दीन-तुलसी को क्यों और किसके कहने पर मारा गया, मैं सारे राज जानता हूं : आजम ने कोर्ट को भेजा पत्र

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : किसी भी दिन आकर बयान देने की मांगी रियायत

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में सोमवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में गैंगस्टर आजम खान की पत्नी रिजवाना के बयान हुए। रिजवाना ने बयान देने के साथ ही आजम का एक पत्र भी कोर्ट को दिया। जिससे आरोपी पक्ष में हंगामा मचा हुआ है।

पत्र में आजम ने कोर्ट को संबोधित करते हुए लिखा है कि सोहराबुद्दीन शेख और तुलसी को क्यों और किसके कहने पर मारा गया, मैं सारे राज जानता हूं और न्यायालय के समक्ष आकर बताना चाहता हूं। लेकिन मुझे डर है कि ये लोग कभी मेरा एनकाउंटर भी कर सकते हैं या मुझे किसी बड़े केस में फंसा सकते हैं। इसलिए मैं कोर्ट की दी हुई तारीख पर बयान देने नहीं आ पा रहा हूं। मैं कोर्ट से विनती करता हूं कि मुझे इतनी रियायत देदी जाए कि मैं किसी भी दिन आकर न्यायालय में बयान दर्ज करा दूं और सच्चाई से अवगत करा सकूं।

पति के एनकाउंटर का डर था, इसलिए हर पेशी पर साथ जाती थी

: रिजवाना ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन मेरे पति आजम खान के दोस्त थे। वे अक्सर अपनी महिला मित्र कौसरबी के साथ हमारे घर आते-जाते रहते थे। नवंबर 2004 में हमने मेरे पति के दोस्त बंटी की बहन के घर सोहराबुद्दीन और कोसरबी का निकाह भी करवाया था। 31 दिसंबर 2004 को बदमाश हामिदलाल हत्याकांड में पुलिस ने मेरे पति की तलाश शुरू की और मुझे व मेरी तीन वर्षीय बेटी को थाने ले गए। दो दिन अवैध हिरासत में रखा, बाद में हमें छोड़ दिया। मैं हमारे रिष्तेदार के यहां मोडासा बेटी के साथ चली गई। मेरे पति भी वहीं आ गए। कुछ दिनों बाद पुलिस ने हमें वहां से पकड़ लिया। मुझे, मेरे पति और बेटी को उदयपुर नाई थाने दस दिन अवैध हिरासत में रखा। मेरी सास ने कोर्ट में इस्तगासा दायर किया तो मुझे, मेरी बेटी को छोड़ दिया और पति आजम को हत्याकांड में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पति से जेल मिलने जाते समय ही पता चला था कि पुलिस हामिदलाल हत्याकांड में सोहराबुद्दीन की तलाश भी कर रही है। बाद में मैंने अखबार में सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर की खबर पढ़ी थी।

: रिजवाना ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने मेरे पति पर अहमदाबाद में एक और केस बनाया था। उन्हें अक्सर पुलिस पेशी पर अहमदाबाद ले जाती थी, उनके साथ इसी केस में एक और व्यक्ति तुलसी जाता था, मुझे डर था कि पुलिस सोहराबुद्दीन की तरह मेरे पति का एनकाउंटर भी कर सकती है, इसलिए मैं और मेरी सास हर पेशी पर उनके साथ अहमदाबाद जाते थे। मैं और मेरी सास उदयपुर एसपी से भी मिले थे और हमारी विनती पर उन्होंने मुझे पति को पेशी पर ले जाते समय उनके साथ यात्रा करने करने की अनुमति दी थी। आखिरी बार जनवरी 2007 में मैं मेरे पति के साथ अहमदाबाद पेशी पर गई थी। जनवरी 2007 से पहले पुलिस ने मेरे पति को किसी चोरी के मामले में भी गिरफ्तार किया था। इस दौरान आई पेशी पर पुलिस तुलसी को पेशी पर अकेले ही अहमदाबाद ले गई थी। बाद में न्यूज पेपर में पड़ा था कि गुजरात पुलिस द्वारा तुलसी का एनकाउंटर हुआ है। मार्च 2010 में तो हामिदलाल हत्याकांड में कोर्ट ने मेरे पति को बरी कर दिया था।

अहमदाबाद के बुकिंग क्लर्क ने बताया तुलसी और चार पुलिस कर्मियों की टिकट बनाई थी

कोर्ट में सोमवार को 2006 में अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के बुकिंग क्लर्क के बयान हुए। बुकिंग क्लर्क शैलेष तिवाड़ी ने बताया कि 26 दिसंबर को उसने पुलिस वारंट पर चार पुलिसकर्मी नारायण सिंह, युद्धवीर सिंह, करतार सिंह और दलपत सिंह की टिकट बनाई थी। वहीं बुकिंग क्लर्क घनश्याम मीणा ने बताया कि 26 दिसंबर 2006 को उदयपुर सेंटल जेल का रेलवे वारंट था, इस पर आजम और तुलसी के नाम लिखे थे। आजम के नाम के आगे क्राॅस लगा था, इस लिए तुलसी का अहमदाबाद से उदयपुर का टिकट बनाया था।

Exit mobile version