उन्होंने कहा कि हम ऋणशोधन अक्षमता और दिवाला संहिता (आईबीसी) के जरिए 25,000-30,000 करोड़ और बाकी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) को की जाने वाली बिकवाली और एक बार के समाधान जैसे अन्य स्रोतों से वसूली की उम्मीद करते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार आईबीसी के तहत पहली सूची में दबावग्रस्त खातों में एसबीआई के 48,000 करोड़ रुपये फंसे थे। वहीं, दूसरी सूची में 28,000 करोड़ रुपये का खुलासा किया गया।
महापात्रा ने बताया , आरबीआई के निर्देशानुसार हमने आईबीसी को दबावग्रस्त खातों में 76,000 करोड़ रुपये फंसे होने का खुलासा किया है और अब तक सिर्फ दो मामलों का समाधान किया गया है।
महापात्रा ने जानकारी दी कि भूषण स्टील के मामले में हमारा 11,500 करोड़ रुपये का दावा था लेकिन हमें 30 फीसदी की कटौती के बाद 8,500 करोड़ रुपये मिले । दूसरे मामले में पैसे निलंब (एस्क्रो) खाते में जमा किए गए। अदालत की मंजूरी मिलने के बाद इसका समायोजन किया जाएगा।
महापात्रा ने कहा कि एसबीआई ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अभिकरण के पास 250 मुकदमे दाखिल किए जिसमें तकरीबन 95,000 करोड़ रुपये का खुलासा किया गया । हम अधिकाधिक वसूली की आशा करते है।
