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तलाक की डिक्री जारी नहीं होने पर कॉलेज में नहीं दिया प्रवेश

परिवादिया ने कॉलेज से वसूला प्रवेश शुल्क सहित हर्जाना

उदयपुर. शहर के अहिंसापुरी, फतहपुरा स्थित ज्योति शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय ने एक छात्रा को प्रवेश देने से इसलिए इनकार कर दिया कि उसके तलाक की कोर्ट से डिक्री जारी नहीं हुइ्र थी। जबकि वह मुस्लिम समाज की थी और उसने तलाक का इकरारनामा दस्तावेज में लगाया था। जिला उपभोक्ता मंच से हुए आदेश से परिवादिया को अब कॉलेज से प्रवेश शुल्क सहित हर्जाना भी मिलेगा। आदेश मंच के अध्यक्ष हिमांशु नागौरी, सदस्य भारत भूषण ओझा और अंजना जोशी ने जारी किए हैं। (udaipur news)

प्रकरण के अनुसार सज्जननगर निवासी अमरीन बानो ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से कराई पीटीईटी 2014 में सफल अभ्यर्थी रही थी। विश्वविद्यालय ने ज्योति बीएड कॉलेज आवंटित किया था। उसने 11 अगस्त 2014 को बैंक ऑफ बड़ौदा के जरिए चालान से प्रवेश शुल्क 20450 रुपए और अंकतालिका व अन्य संबंधित दस्तावेज जमा करवाए थे। प्रवेश के बाद वह जब कॉलेज गई तो कॉलेज प्रबंधन ने उसे बैठने की अनुमति नहीं दी।

कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि उसने प्रवेश तलाक श्रेणी में लिया है और इसके लिए सिर्फ तलाक का इकरारनामा प्रस्तुत किया है। इकरारनामा मान्य नहीं है, प्रवेश के लिए कोर्ट से जारी हुई डिक्री पेश करनी होगी। परिवादीया ने कॉलेज प्रबंधन को समझाया कि मुस्लिम समाज में तलाक इकरार ही पर्याप्त होता है। लेकिन कॉलेज प्रबंधन नहीं माने और उसका प्रवेश निरस्त कर दिया। परिवादीया ने जमा कराई हुई फीस लौटाने का कहा तो कॉलेज प्रबंधन ने फीस भी नहीं लौटाई।

इस पर परिवादीया ने जिला उपभोक्ता मंच में परिवाद पेश किया। मंच के पीठासीन अधिकारी ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कॉलेज को आदेश दिए हैं कि वह परिवादीया को प्रवेश शुल्क के 20450 रुपए, इस राशि पर 11 अगस्त 2014 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर राशि और 3000 मानसिक संताप और 2000 परिवाद व्यय के देगा।

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